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कार से कुल्लू-मनाली की यात्रा

कूल्लू-मनाली यात्रा 


कार से कूल्लू-मनाली  यात्रा
कूल्लू-मनाली यात्रा 

यात्रा पूर्व तैयारी 

        मई में स्कूल के रिज़ल्ट आए। बेटू से वादा किया था कि अगर वह स्कूल के एग्जाम में टॉप करेगा, तो हम उसे ट्रिप पर ले जाएंगे। यह सिर्फ़ एक मज़ाक था। लेकिन बेटू ने इसे सच कर दिया। अब हमें जाना था। सबकी गर्मी की छुट्टियां भी लग गई थीं, लेकिन दिक्कत ट्रेन में सीट मिलना मुमकिन नहीं था, अगले तीन महीने तक सभी सीटें बुक थी। और ज़्यादातर टूरिस्ट बसें अपने निर्धारित यात्रा मार्ग पर जा चुकी थीं। सारे ऑप्शन खत्म होने से कार से जाने का ही एक विकल्प बचा था। बहुत सोच विचार के बाद, कार से जाने का फ़ैसला लिया। सबने अपने बैग पैक किए, अगली सुबह निकलने की उम्मीद से रात को कार के पेपर और ड्राइविंग लाइसेंस चेक किए, तो एक नई दिक्कत आ गई। मेरे ड्राइविंग लाइसेंस की रिन्यूअल डेट निकल चुकी थी। ऐसे में ट्रिप पर जाना संभव नहीं था। यह सुनकर सभी परेशान हो गये। पत्नि जी ने भी झिड़क दिया कहने लगी ये आपकी बहुत बड़ी लापरवाही है। खैर  हमने रात में  ही एजेंट से बात की, और उसने कहा कि इसमें तीन दिन लगेंगे। सुबह सबसे पहले, अपने लाइसेंस रिन्यूअल प्रोसेस किए। अब यहां से हमारी नई भाग-दौड़ शुरू हो गई । धीरे धीरे समय बीत रहा था। सभी की नाराज़गी भी बढ रही थी। एक हफ्ता बीत गया तब दोपहर के करीब 3.00 बजे एजेंट का फोन आया कि आपका लाईसेंस आ गया है।  यह सुनते ही सभी खुश हो गये और मात्र एक धंटे में यात्रा की तैयारी कर ली। 

यात्रा मार्ग और आकस्मिक घटनाऐं
 

यात्रा की शुरुआत हनुमान मंदिर में दर्शन से शुरू करी। अभी 10-15 किमी का सफर ही तय किया होगा  कि अचानक गाडी में  पीछे बांई तरफ़ से कुछ आवाज आने लगी। हमने रुक कर कार चेक करी मगर कुछ समझ नहीं आया । सफर लंबा था और परिवार के साथ कोई रिश्क नहीं ले सकते थे। इसलिए वापस अपने गृह नगर आये और कार सीधे गैरेज पर ले गए। वहां मेकेनिक ने गाड़ी चैक करी तो पता चला कि शाकब का कवर टकरा रहा था । उसे ठीक करने में करीब एक घंटे का समय लग गया , इघर शाम 5.30 बजने वाले थे अभी भी गर्म हवाएं बैचैन कर रही थी। मगर घूमने के उत्साह मे कहीं कोई कमी नहीं आई थी । इसलिए सफर जारी रखने का फैसला किया। पहले दिन करीब 250 किमी का सफर तय करके नीमच में रात 12.30 बजे विश्राम किया।

शाम चार बजे हम कार से कूल्लू-मनाली की तरफ चल दिए।

अगले दिन सुबह 7:00 बजे हमने होटल से चेक आउट किया। हमारे दूसरे दिन के सफ़र के रूट चार्ट में किशनगढ़-चंडीगढ़ हाईवे शामिल था। सुबह से ही बहुत गर्मी थी, इसलिए किसी की कार से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई। हम एक जगह रुके, चाय और हल्का नाश्ता किया और चल दिये। 278 किलोमीटर चलने के बाद सुबह करीब 11:30 बजे किशनगढ़ पहुंचे। चार घंटे के लगातार सफ़र से सब थोड़े थक चुके थे। लंच का भी टाइम हो रहा था। हम हाईवे पर एक वेजिटेरियन होटल में लंच के लिए रुके। वहां खाना खाने के बाद एक घंटा आराम किया और दोपहर 2:00 बजे फिर चल दिये। बाहर का टेम्परेचर 49 डिग्री था। गर्म हवा हमारे शरीर को झुलसा रही थी। कार का AC फुल कैपेसिटी पर चलने के बाद भी ठंड का कोई एहसास नहीं हो रहा था। सड़कें सुनसान पड़ी थी। ट्राफिक न के बराबर था। कभी कोई इक्का-दुक्का गाड़ी मिल रही थी। करीब सौ किलोमीटर चलने के बाद हम एक मंदिर के छोटे से बग़ीचे में थोड़ी देर के लिए रुके।   टेम्परेचर  51 डिग्री होने से गर्म हवाएं परेशान कर रही थी। यहां थोड़ी देर आराम करने के बाद हम फिर चल दिये। गर्मी बर्दाश्त से बाहर थी। ज़्यादातर ट्रक ढाबे पर खड़े थे। कुछ जगहों पर डामर नरम होकर फैल रहा था। अचानक एक मोड़ पर हमारी कार का अगला ड्राइवर साइड का टायर फट गया। किस्मत से, कार 40-50 km/h की स्पीड से चल रही थी, इसलिए कुछ अनहोनी नहीं हुई। जब हमने टायरों को छुआ, तो हमें एहसास हुआ कि वे कितने गर्म हो गए थे। नट और बोल्ट भी बहुत गर्म थे। उन्हें ढीला करने से पहले हमें पानी से ठंडा करना पड़ा। जब हम स्पेयर टायर बदल रहे थे, तो पास में खड़े ट्रक के ड्राइवरों ने हमारी मदद की और बाकी परिवार के लिए होटल के पास एक पेड़ की छांव में बैठने का इंतज़ाम किया। उन्होंने हमें सिर्फ़ सुबह और शाम को ही सफर करने की सलाह दी। फ़िलहाल, स्पेयर टायर न होने से एक नई दिक्कत खड़ी हो गई । टायर सिर्फ़ डीडवाना में ही मिलेंगे और वह यहां से लगभग बारह किलोमीटर दूर था।  शाम भी होने वाली थी अतः टायर का जुगाड करना बेहद जरूरी था और खाश बात थी कि हमारी गाड़ी में लगने वाले नंबर का नया टायर यहां मिलेगा भी या नहीं।  यही विचार से हम पंचर बनाने वाले के पास गये। उसने हमें एक दुकान का पता दिया कि वहां तलाश करें शायद मिल जाय।  करीब बीस मिनट में हम उस दुकान पर पहुंच गये थे। वहां टायर उपलब्ध नहीं हुआ मगर उन्होंने कुछ देर में लाकर देने का वादा अवश्य किया। इस तरह रात 8.00 बजे आगे के सफर रवाना हुए। इन सब समस्याओं के कारण एक दिन बर्बाद हो गया था। इसकी भरपाई के लिए अब थोड़ा ज़्यादा चलना पड़ा और रात 12.30 बजे कैलानिया स्थित एक होटल में रुके। अगले दिन सुबह 5.30 बजे हमने चेक आउट किया। 


कार से कूल्लू-मनाली  यात्रा
दिल्ली चंडीगढ़ हाई-वे 


आज का सफर 430 किमी चंडीगढ़ तक ह सुबह की ताज़ी हवा ने सबमें एक जोश भर दिया था। कुछ किमी चलने के बाद अब थोड़ा सा परिवर्तन देखने को मिल रहा था। कहीं कहीं पर हल्की सी हरियाली नजर आने लगी थी। ये राजस्थान पंजाब का बार्डर इलाका था। यहां सड़कें ठीक ठाक ही थी। मगर स्पीड नहीं ले पा रहे थे। 

चंडीगढ़ प्रवेश 

आखिरकार, दोपहर करीब 3:00 बजे हम चंडीगढ़ पहुँचे, जो एक साफ़-सुथरा, व्यवस्थित, सुंदर और हरा-भरा शहर है। शिवालिक पहाड़ों की तलहटी में बसे इस शहर का नाम देवी चंडी के नाम पर रखा गया है। इसे ट्राइसिटी के नाम से भी जाना जाता है। यह हरियाणा और पंजाब दोनों की राजधानी होने के साथ-साथ एक केंद्र शासित प्रदेश भी है। यह शहर 56 सेक्टरों से बना है।

शहर पहुंच कर, हम होटल की तलाश में रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़े। हमें वहां एक अच्छा होटल मिल गया। थोड़ी देर आराम करने के बाद, हम टहलने निकले, लेकिन शाम को भारी ट्रैफिक के कारण हमें होटल वापस लौटना पड़ा। 

चंडीगढ़ बहुत खूबसूरत शहर है और यहां घूमने के लिए कम से कम दो दिन ज़रूर चाहिए। खूबसूरत गार्डन, ज़ू , झीलें, बड़े शॉपिंग सेंटर और हिस्टोरिकल म्यूज़ियम हैं। यहां की कुछ मशहूर जगहें हैंका था।  सुब

जापानी गार्डन, इंटरनेशनल डॉल्स म्यूज़ियम, ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन, गवर्नमेंट म्यूज़ियम और आर्ट गैलरी, श्री माता मंशा देवी मंदिर (पंचकूला), रॉक गार्डन, सुखना लेक, बटरफ्लाई पार्क, गार्डन ऑफ़ साइलेंस, ओपन हैंड मॉन्यूमेंट, चंडीगढ़ बॉटनिकल गार्डन, इंडियन एयर फ़ोर्स हेरिटेज म्यूज़ियम, इलांटे मॉल, इस्कॉन टेम्पल, सेक्टर- 17 मार्केट, लैज़र वैली, छतबीर ज़ू , कैपिटल कॉम्प्लेक्स, ली कॉर्बूसियर सेंटर और राम दरबार यहां की खास जगहें हैं।

हमने अपना टूर सुबह 8:00 बजे शुरू किया।  सभी जगहों पर जाना संभव नहीं था क्योंकि हमारे पास टाइम लिमिट और सफ़र भी काफी लंबा था। लेकिन, हमने जैपनीज़ गार्डन से शुरुआत की। अंदर के सभी स्ट्रक्चर  जैपनीज़ थीम वाले हैं। यहां हमने स्थानीय रहवासीयों को सुबह की वॉक करते और हल्की एक्सरसाइज़ करते देखा। यहां लगी कुछ मशीनों पर हमने भी ट्राई किया। 

कार से कूल्लू-मनाली  यात्रा
जापानी गार्डन 

          वहां से हम सुखना लेक गए। यह बहुत शांत जगह थी। सुबह की ठंडी हवा ने सबको फ्रेश महसूस कराया।      यहां शामें बहुत अच्छी होती हैं, और ज़्यादातर टूरिस्ट इसी समय आते हैं। वहां कुछ समय बिताने के बाद, हम रोज़ गार्डन की ओर बढ़े। इस गार्डन में गुलाब की अनगिनत किस्में थीं; अलग-अलग रंगों में भारतीय और विदेशी दोनों तरह की किस्में बहुत खूबसूरत लग रही थीं।                                                                                                     

कार से कूल्लू-मनाली यात्रा
रोज़ गार्डन , चंडीगढ़ 

दोपहर में, हम चंडीगढ़ की सबसे मशहूर जगह, नेक चंद रॉक गार्डन गए। यहां कमाल की कलाकृतियां बनी हुई थीं—सभी टूटी-फूटी चीज़ों से। कुछ जगहों पर, ये कलाकृतियां लगभग असली जैसी लग रही थीं। झरने और घुमावदार रास्तों को बहुत ही कलात्मक तरीके से बनाया और सजाया गया था । इस गार्डन में एक विशेष आकर्षण केन्द्र यहां का झरना था।  गर्मी के मौसम में ठंडा ठंडा पानी बहुत सुकून दे रहा था। पुरा गार्डन घुमने में करीब दो घंटे का समय लगा।  



कार से कूल्लू-मनाली  यात्रा
नेक चंद राॅक गार्डन , चंडीगढ़ 

कार से कूल्लू-मनाली यात्रा
नेक चंद राॅक गार्डन चंडीगढ़ 

शिमला प्रस्थान 

         लंच के बाद, हम शाम करीब 4.00 बजे शिमला की ओर निकले। गूगल के हिसाब से दूरी 120 km थी और समय 4 घंटे का होगा। हमने अंदाज़ा लगाया कि हम रात 9.00 बजे तक पहुंच जाएंगे क्योंकि यह पहाड़ों में मेरी पहली ड्राइविंग थी। मुझे थोड़ा डर लग रहा था। फिर भगवान को याद करके हम निकल पड़े। यहां बहुत सावधानी और स्पीड कंट्रोल बहुत ज़रूरी है। हमें कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि सड़कों की हालत बहुत अच्छी थी। हां, सड़कें बहुत घुमावदार और ऊपर-नीचे थीं। यह बहुत बिज़ी रूट है और ज़्यादा ट्रैफिक प्रेशर की वजह से कभी-कभी ट्रैफिक जाम हो जाता है। हमें एक-दो जगह थोड़ा जाम लगा।



कार से कूल्लू-मनाली यात्रा
शिमला हाई-वे 


  शिमला की लाइटें दूर से टिमटिमा रही थीं। घुमावदार पहाड़ी रास्तों से गुज़रने के बाद, हम आखिरकार रात 8:50 बजे शिमला पहुंच गए। हमें मॉल रोड के पास एक होटल मिल गया था। चलो कल मिलते हैं शिमला के टूरिस्ट स्पॉट्स घूमने और मॉल रोड पर एक शाम बिताने के लिए।


                                                                      ॥ जय श्री कृष्ण  ॥



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