वैष्णो देवी दर्शन, भैरव बाबा और शिवखोड़ी यात्रा जम्मू-कश्मीर ट्रिप
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| डल झील |
डल झील और हाउसबोट
पहलगाम से श्रीनगर पहुंचते-पहुंचते शाम हो गई थी। हम सीधे डल झील की तरफ चल दिए । रास्ते में अधिकतर जगह जाम लगा हुआ था। यहां पर्यटन के लिहाज से सबसे व्यस्ततम समय रहता है। मैदानी इलाकों में जहां गर्मी अपने शबाब पर होती है। वहीं ठंडे क्षेत्रों का आकर्षण बढ जाता है। फिर काश्मीर तो पहली पसंद रहता है। आखिरकार, हम झील के किनारे पहुंचे। वहां इंतज़ार कर रहे हाउसबोट के मालिक ने हमारा सामान अपनी शिकारा (कश्मीर की एक पारंपरिक नाव) में रखने में मदद की, और हम हाउसबोट की तरफ चल दिए। शाम के समय झील पर टिमटिमाती रोशनी का प्रतिबिंब बहुत सुंदर लग रहा था। सजे हुए शिकारों ने शाम की खूबसूरती और बढ़ा दी थी। झील के मनमोहक नज़ारों का मज़ा लेते हुए, हम जल्द ही अपनी हाउसबोट पर पहुंच गए।
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| बोट हाऊस,डल झील |
यह एक बड़ी नाव पर बना घर था। इसके बाहर एक छोटा सा बगीचा बना रखा था। जहां बैठकर घंटों झील की सुंदरता का आनंद ले सकते हो। बोट हाउस में अंदर, एक छोटा सा लिविंग रूम, दो बेडरूम, एक किचन और एक बाथरूम था, जिससे हाउसबोट काफी लग्ज़री लग रही थी। हाउसबोट का सबसे आकर्षक हिस्सा डेक पर बना बगीचा था, यहां सभी लोग काफी देर तक बैठे रहे और झील की सुंदरता और खुले में मौसम का लुफ्त उठाते रहे। बाहर ठंड बढने लगी थी और चहल-पहल भी कम हो गई थी। दूर शंकराचार्य मंदिर में शाम की आरती की घंटियों की आवाज़ झील के उस पार गूंजने लगी थी शायद शयन आरती हो। धीरे-धीरे सब तरफ वातावरण शांत हो रहा था। हम लोगों का खाना लग चुका था। भोजन करने के बाद काफी देर तक गपशप करते हुए देर रात अपने बेडरूम में चल दिए।
अगले दिन सुबह जल्दी निकले, 7.00 बजे तक किनारे पहुँच गए। धन्य हो, टैक्सी वाला समय पर आ गया था।हमारा 9.00 बजे एयरपोर्ट पर रिपोर्टिंग समय होने से रास्ते में कहीं भी नहीं रुके। समय पर निकलने से किसी तरह की परेशानी नहीं आई। वैसे श्रीनगर एयरपोर्ट पर कुछ ज़्यादा ही चेकिंग चल रही थी। खैर सब ठीक रहा। ठीक समय पर जम्मू पहुंच गए।
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| जम्मू, एयरपोर्ट |
कटरा पहुंचने का अनुभव
एयरपोर्ट से कटरा के लिए टैक्सी करी। कटरा में भी बहुत भीड़ थी । मगर पहले से होटल बुक होने से कोई कठिनाई नहीं आई। होटल में थोड़ा समय विश्राम करके शाम को स्थानीय बाजार में घुमने निकल गए थे।
कटरा मे तो हमेशा ही भीड़ रहती है। मगर अवकाश और धार्मिक पर्वों पर कुछ ज्यादा ही भीड़भाड़ हो जाती है। ऐसे समय पर ठहरने के सीमित साधन रहते है। आज भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
बाज़ार की रौनक देखते ही बन रही थी। यहां सारे भारत और विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। हम लोगों को घुमते फिरते काफी समय हो गया था। लोटते वक्त रेस्टोरेंट में खाना खाकर होटल पहुंचे तब तक रात के दस बज चुके थे।
माता वैष्णो देवी भवन की यात्रा एवम
दर्शन
सब लोग सो गए थे। हमें सुबह माता वैष्णो देवी के दर्शन करने थे। मंदिर तक पहुँचने के लिए, लगभग 11 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता पार करना था, जिसके बाद भैरव मंदिर तक जाने वाला 1.5 किलोमीटर का और रास्ता था। सबने सुबह जल्दी निकलने का फैसला किया। ठीक 5:00 AM बजे निकले और दूसरा रास्ता लिया। इस खास रास्ते के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था। सभी ज़रूरी फॉर्मैलिटी पूरी करने के बाद, चढ़ाई शुरू की। सुबह का ठंडा मौसम और ताज़ी हवा बहुत ताज़गी देने वाली लग रही थी। हमने रास्ते में बीच-बीच में ब्रेक लेकर सफ़र पूरा किया। आखिर में, अर्ध कुंवारी पहुँचकर और वहाँ का नज़ारा देखकर, हमें एहसास हुआ कि आगे कितनी भारी भीड़ होगी। हर जगह भक्तों की लंबी लाइनें देखी जा सकती थीं। पूछने पर, हमें पता चला कि हमारी बारी आने में चार से पाँच दिन लगेंगे, और रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होगा। चूँकि हमारी ट्रेन का रिज़र्वेशन दो दिन बाद का था, इसलिए हमने सीधे मुख्य मंदिर की ओर जाने का फैसला किया।
दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था
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| माता वैष्णोदेवी यात्रा मार्ग |
अभी आधी ही दूरी तय की थी। इतना ही और चलना था, अब थकान महसूस होने लगी थी। लेकिन, रास्ते में मिलने वाली शानदार विश्राम व्यवस्था , भोजन और पानी ने इसे आसान बना दिया। बस श्रद्धा और विश्वास के साथ चलते रहे, इससे ताज़ागी बनी रही, आखिरकार मंदिर पहुँच गए। मुख्य मंदिर के पास का नज़ारा हमारी सोच से भी परे था। लंबी लाइनें लगी थीं। एक पल के लिए हमारी हिम्मत जवाब दे गई, लेकिन पास खड़े एक सेवादार ने हमें बताया कि जल्द ही दर्शन हो जायेंगे। अपना सामान, जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, फ़ोन, घड़ी, पेन, और कोई भी दूसरी मना की हुई चीज़े, एक लॉकर में रखकर लाइन में लग जाएं। हमने ठीक वैसा ही किया। रास्ते में चेक-इन के दौरान, मेरी पत्नी ने गलती से देखा कि उन्होंने अपनी रिस्टवॉच पहनी हुई है, इसलिए हमें वापस लौटना पड़ा। इसमें बहुत समय बर्बाद हुआ। हाँ, दर्शन बहुत अच्छे से हुए। बाहर आकर भोजन प्रसाद लिया, और भैरवनाथ की ओर चल पड़े। शाम हो चुकी थी।
भैरव बाबा मंदिर की चढ़ाई
ये सीधी खड़ी चढ़ाई थी थोड़ी मुश्किल आई मगर धीरे-धीरे भैरव मंदिर पहूंच गए। वापसी आने में रात 9.00 बज गए । ठंड ने अपना रुप दिखाना शुरू कर दिया था । ठंड और थकान के कारण थोड़ी देर विश्राम किया। इस बीच आश्रय स्थल का प्रयास करते रहे मगर भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि खुले बरामदे में ही श्रद्धालु सो गए थे। ऐसे में हमारे पास एक ही विकल्प था वापसी का ।
रात की वापसी यात्रा
सभी वापसी के लिए तैयार हो गए। यहां से हमारी अलग चुनौती शुरू हो गई थी। ठंड का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा था ऊपर से नींद इन सब के साथ लगातार चलना।
लगभग सारी रात ही रुकते चलते रहे। सुबह करीब 6.30 बजे बस स्टैंड पर हल्का नाश्ता कर सीधे होटल पहुंचे। थकान और नींद से बुरा हाल हो रहा था। जाते ही जो सोए तो शाम 5.00 बजे नींद खुली।
कटरा बाजार की सैर
होटल में चाय और नाश्ते के बाद, हम कटरा बाज़ार की ओर चल पड़े। शाम का बाज़ार देखने लायक था। हर जगह भीड़-भाड़ वाले होटल और दुकानें थीं, जो आकर्षक लाइटिंग से जगमगा रही थीं। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि रात के 11:00 बज गये हैं। बाहर से टैक्सी, कार और बसें अभी भी आ रही थीं। कल
शिवखोड़ी यात्रा का अनुभव
हमारा दिन खाली था, इसलिए हमने शिवखोड़ी जाने का प्लान बनाया और एक टैक्सी बुक की।
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| वैष्णोदेवी मंदिर मार्ग |
अगले दिन, हम अपने तय समय सुबह 7:30 बजे शिवखोड़ी के लिए निकले। रास्ते में, हमने नौ देवी गुफा मंदिर और श्री बाबा धनसरजी मंदिर देखा। शांत और प्राकृतिक नज़ारों से भरी यह जगह बहुत अच्छी लगी। व्यू पॉइंट के आसपास की हरी-भरी हरियाली, खासकर व्यू पॉइंट , सभी को लुभा रहा था। हमारा अगला स्टॉप शिवखोड़ी था। यहाँ से, ज़्यादातर रास्ता पहाड़ी और घुमावदार था। शिवखोड़ी गुफा तक पहुँचने के लिए लगभग 7 km का ट्रेक है। आपको पहले शिवखोड़ी में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। गुफा में भगवान शिव की एक मूर्ति है। पहाड़ी पर होने की वजह से, आस-पास का नज़ारा सच में बहुत सुंदर है।
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| बाबा धंन्सरजी |
हम रात 8:00 बजे कटरा वापस पहुँचे। दिन भर के बिज़ी शेड्यूल से थकान और भूख ने हमारी हिम्मत तोड़ दी थी। हमने पास के एक रेस्टोरेंट में डिनर किया और अपने होटल लौट आए। तब तक रात के करीब 10:00 बज चुके थे। सब लोग जल्द ही आराम करने के लिए अपने कमरों में चले गए।
वापसी यात्रा और निष्कर्ष
सुबह कटरा से इंदौर के लिए डायरेक्ट ट्रेन थी। हम ठीक 7:30 बजे स्टेशन पहुँच गए। क्योंकि हमारे पास रिज़र्वेशन था, इसलिए हमें सीट मिलने में कोई दिक्कत नहीं हुई। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर की हमारी ट्रिप खत्म होती है। हमें उम्मीद है कि आपको हमारे ब्लॉग में जम्मू और कश्मीर के बारे में बहुत सारी जानकारी मिली होगी। हम आपके कीमती सुझाव शेयर करके अपनी अगली ट्रिप को सपोर्ट करेंगे। हम जल्द ही कूल्लू-मनाली कार यात्रा पर एक सीरीज़ वापस ला रहे हैं।
यदि आप वैष्णोदेवी यात्रा के लिए आ रहे है तो ।
निकटतम एयरपोर्ट जम्मू है यहां से टेक्सी से कटरा जाना होगा। इसकी दूरी करीब 45 किमी है। कटरा में बाज़ार, होटलें व रेस्टोरेंट की समुचित व्यवस्था है।
ट्रेन से आ रहे है तो कटरा में रेल्वे स्टेशन है । यह दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
यदि सड़क मार्ग से आ रहे हैं तो यह देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है ।





