header

Hanumanji लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Hanumanji लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी

 

विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी के दरबार में



विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी
विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


एक कहावत है। जब मन से याद करो तो इच्छा अवश्य पुर्ण होती है। वैसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। एक पारिवारीक शादी में शामिल होने पेटलावद जाना था। घर के अधिकांश लौग बस से रवाना हो गये थे। हम कुछ सदस्यों को कार से जाना था। सभी ने तय किया तारखेडी हनुमान जी के दर्शन करने चलेगें।  


विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी

विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


सभी अति प्रसन्न थे कि चलो तारखेडी हनुमान जी के दर्शन लाभ भी हो जायेंगें। समय का सद उपयोग कर रास्ते में कहीं पर भी नहीं रूके। हमारे साथ चल रही गाडी के सभी लौग मार्ग से भलीभांति परिचीत थे। इसलिये मार्ग में कोई असुविधा भी नहीं हुई। इंदौर अहमदाबाद हाईवे पर राजगढ ग्राम से थोडा चलने पर तारखेडी के लिये मुडना पडता है। खैर, मंदिर पहुंच कर बडा सकून मिला। प्रागंण में राम धुन के चलते माहौल पूर्ण भक्ति मय था।  सभी ने दर्शन कर मंदिर में कुछ देर विश्राम किया। यहां के बारे में जानने कि मेरी उत्सुकता ने स्थानिय भक्तों से मुलाकात करी। 

इतिहास 

एक वृद्ध सज्जन ने बताया कि महंत श्री राम जी प्रप्पन्न  हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। सदा हनुमान जी की भक्ति में लीन रहते थे। एक दिन वह हनुमान जी कि अराधना कर रहे थे। तभी उन्हें दिव्य अनुभुति का अहसास हुआ। उसी रात हनुमान जी ने स्वप्न में दर्शन देकर दिव्य मुर्ति के बारे में बताया। प्रातःकाल पुर्ण विधी विधान से खुदाई कर दिव्य प्रतिमा निकाली और जहां आज मंदिर है। वहीं पर स्थापना कर पुजा अर्चना करने लगे।तभी से यहां पर हवन, पुजन ,आरती, सुन्दरकांड और रामायण पाठ तथा राम धुन होती रहती है।  सन 1970 से अखंड ज्योत प्रजव्लित है। 

आस्था

विश्वमंगल हनुमान जी के भक्तों की आस्था इतनी प्रबल है। कि जब भी कोई नया काम ,नया वाहन अथवा नवीन कार्य का शुभारंभ करता है। तो सर्वप्रथम मंदिर में हनुमान जी के समक्ष उपस्थित होकर उनकी कृपा और सफलता के लिये प्रार्थना करता है। 
प्रत्येक मंगलवार को हवन कीर्तन होते है। हनुमान जयंती पर महाआरती के पश्चात प्रसादी वितरण का आयोजन होता है। प्रति वर्ष अश्विन व चैत्र नवरात्रों मे मंदिर में विशेष साज सज्जा की जाती है। अखंड रामायण पाठ किये जाते है। 


विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी
विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


 एक बार यहां दर्शन कर अनुभव कर सकते है। हनुमान जी के एक और दिव्य चमत्कारी अति प्राचीन बलवारी हनुमान  मंदिर तक  पद यात्रा कर सुखद दिव्य अनुभूति का अहसास होगा । यकीन ना हो तो एक बार कर के देखे ।  

कैसे पहूंचें


निकटतम रेल्वे स्टेशन  मेधनगर व बामनिया हैं। जो कि रतलाम बडौदा रेल मार्ग पर स्थित है। यहां से बस अथवा छोटे वाहन से मंदिर पहूंच सटते है। 
निकटतम सर्व सुविधा युक्त ग्राम पेटलावद है।

सडक मार्ग से इंदौर अहमदाबाद हाईवे पर राजगढ से आगे पेटलावद मार्ग पर जाना होता है।
 
              जय सियाराम 



 

विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी के दरबार में



विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी
विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


एक कहावत है। जब मन से याद करो तो इच्छा अवश्य पुर्ण होती है। वैसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। एक पारिवारीक शादी में शामिल होने पेटलावद जाना था। घर के अधिकांश लौग बस से रवाना हो गये थे। हम कुछ सदस्यों को कार से जाना था। सभी ने तय किया तारखेडी हनुमान जी के दर्शन करने चलेगें।  


विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी

विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


सभी अति प्रसन्न थे कि चलो तारखेडी हनुमान जी के दर्शन लाभ भी हो जायेंगें। समय का सद उपयोग कर रास्ते में कहीं पर भी नहीं रूके। हमारे साथ चल रही गाडी के सभी लौग मार्ग से भलीभांति परिचीत थे। इसलिये मार्ग में कोई असुविधा भी नहीं हुई। इंदौर अहमदाबाद हाईवे पर राजगढ ग्राम से थोडा चलने पर तारखेडी के लिये मुडना पडता है। खैर, मंदिर पहुंच कर बडा सकून मिला। प्रागंण में राम धुन के चलते माहौल पूर्ण भक्ति मय था।  सभी ने दर्शन कर मंदिर में कुछ देर विश्राम किया। यहां के बारे में जानने कि मेरी उत्सुकता ने स्थानिय भक्तों से मुलाकात करी। 

इतिहास 

एक वृद्ध सज्जन ने बताया कि महंत श्री राम जी प्रप्पन्न  हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। सदा हनुमान जी की भक्ति में लीन रहते थे। एक दिन वह हनुमान जी कि अराधना कर रहे थे। तभी उन्हें दिव्य अनुभुति का अहसास हुआ। उसी रात हनुमान जी ने स्वप्न में दर्शन देकर दिव्य मुर्ति के बारे में बताया। प्रातःकाल पुर्ण विधी विधान से खुदाई कर दिव्य प्रतिमा निकाली और जहां आज मंदिर है। वहीं पर स्थापना कर पुजा अर्चना करने लगे।तभी से यहां पर हवन, पुजन ,आरती, सुन्दरकांड और रामायण पाठ तथा राम धुन होती रहती है।  सन 1970 से अखंड ज्योत प्रजव्लित है। 

आस्था

विश्वमंगल हनुमान जी के भक्तों की आस्था इतनी प्रबल है। कि जब भी कोई नया काम ,नया वाहन अथवा नवीन कार्य का शुभारंभ करता है। तो सर्वप्रथम मंदिर में हनुमान जी के समक्ष उपस्थित होकर उनकी कृपा और सफलता के लिये प्रार्थना करता है। 
प्रत्येक मंगलवार को हवन कीर्तन होते है। हनुमान जयंती पर महाआरती के पश्चात प्रसादी वितरण का आयोजन होता है। प्रति वर्ष अश्विन व चैत्र नवरात्रों मे मंदिर में विशेष साज सज्जा की जाती है। अखंड रामायण पाठ किये जाते है। 


विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी
विश्वमंगल हनुमान जी,तारखेडी


 एक बार यहां दर्शन कर अनुभव कर सकते है। हनुमान जी के एक और दिव्य चमत्कारी अति प्राचीन बलवारी हनुमान  मंदिर तक  पद यात्रा कर सुखद दिव्य अनुभूति का अहसास होगा । यकीन ना हो तो एक बार कर के देखे ।  

कैसे पहूंचें


निकटतम रेल्वे स्टेशन  मेधनगर व बामनिया हैं। जो कि रतलाम बडौदा रेल मार्ग पर स्थित है। यहां से बस अथवा छोटे वाहन से मंदिर पहूंच सटते है। 
निकटतम सर्व सुविधा युक्त ग्राम पेटलावद है।

सडक मार्ग से इंदौर अहमदाबाद हाईवे पर राजगढ से आगे पेटलावद मार्ग पर जाना होता है।
 
              जय सियाराम 



अति प्राचीन बलवारी हनुमान मंदिर तक पद यात्रा

 अति प्राचीन बलवारी हनुमान मंदिर तक पद यात्रा 

अति प्राचीन बलवारी हनुमान मंदिर तक पद यात्रा
बलवारी हनुमान मंदिर 

पद यात्रा

बलवारी ग्राम के आस पास क्षेत्रों में मान्यता है। कि हनुमान जी की कृपा पुरे वर्ष उन पर बनी रहे। इसलिये  नव वर्ष के पहले हफ्ते में तय दिन पद यात्रा कर झंडा चढ़ाते है। इसी कडी में मनावर से वर्ष के पहले सोमवार को यह यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा का आयोजन नगर के प्रतिष्ठित गणमान्य लौग करते है। सैकडों की संख्या में नगरवासी इसमें शामिल होते हैं। 
एक वर्ष मुझे भी इस यात्रा का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हम सभी लोग सुबह धार रोड स्थित हनुमान जी के मंदिर पहुंचे। यहां पर सभी ने सामुहिक रुप से हनुमान चालिसा का पाठ किया । इसके पश्चात विधिवत यात्रा की शुरूआत हुई ।  22 किमी की इस पद यात्रा में बडी संख्या में श्रद्धालू सम्मिलित हुऐ थे। जय सीया राम के जयकारों से पुरा मार्ग गूंजायमान हो रहा था। रास्ते में भक्त लोग पदयात्रियों के लिये चाय पानी व नाश्ते की व्यवस्था कर रहे थे। एक जगह हम अपने  सहयात्रियों के साथ चाय व पानी के लिये रुके। यहां से फिर तरो ताजा हो आगे चल दिये। पैदल चलने के कारण ठंड में भी गर्मी का अहसास होने लगा था। लिहाजा स्वेटर उतारना पडा। कुछ देर तक तो स्वेटर लेकर चलें किंतु थकान होने पर ये बोझ लगने लगा। तब साथ चल रहे परिचीत के वाहन में रख थोडा सकून महसुस किया। करीब आधे मार्ग तय करने पर एक जगह थोडे विश्राम और चाय नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। यहां पहूंचने पर जैसे ही थोडा सुस्ताने के लिये रुके बडा सकून महसुस किया साथ ही समझ आ रहा था। आगे का मार्ग आसान नहीं है। खैर अब प्रण किया है तो निभाना पड़ेगा ही। संगी साथियों से बलवारी हनुमान जी के बारे में और जानने के लिये चर्चा की।

अति प्राचीन बलवारी हनुमान मंदिर तक पद यात्रा

इतिहास 

मंदिर के पुजारी जी के अनुसार उनके पूर्वजों के समय से  इस मंदिर की पुजा अर्चना करते आ रहे है। कहते है सन 1100 के पुर्व से ही यह मुर्ति यहां स्वयंम प्रकट हुई थी। करीब साडे बारह फीट की मुर्ति बिना किसी सहारे के खडी हुई है। उस समय धना जंगल था। हर समय जंगली जानवरों का भय बना रहता था। किंतु हनुमान जी की कृपा से यह स्थान पावन हो गया था। यहां निर्भय होकर भक्त सतत पुजा अर्चना निरंतर करते आ रहे है। कई वर्षो तक तो मंदिर खुले में ही था।  इंदौर के व्यवसायी को हनुमान जी की प्रेरणा से मंदिर की छत डालने का अवसर प्राप्त हुआ।समय समय पर निर्माण होता गया। 

हमारी पद यात्रा भी चल रही थी। गंधवानी ग्राम तक आने पर थकान महसूस होने लगी थी। किसी तरह यात्रा जारी रखी। हनुमान जी की कृपा से हम मंदिर पहूंच गये। सभी ने मिलकर आरती करी। आरती पश्चात भंडारे का आयोजन था। वहां सभी ने मिलकर प्रसादी ग्रहण करी।
 हनुमान जयंती पर व समय समय पर कई बडे आयोजन होते रहते है। 


अति प्राचीन बलवारी हनुमान मंदिर तक पद यात्रा



    बलवारी हनुमान जी की कृपा से भक्तों को कई अदभुत सुखद अनुभव प्राप्त हुऐ है। बहुत दुर दुर सें भक्त आते है।     
पहूंच मार्ग :-
सडक मार्ग 

इंदौर से धामनोद मनावर होते हुऐ गंधवानी ग्राम से 160  किमी

यदि आप इंदौर अहमदाबाद मार्ग से आते हैं। तो मांगोद जीराबाद होते हुऐ 130 किमी का सफर है।
रेल मार्ग व वायु मार्ग केवल इंदौर तक ही उपलब्ध है।
 भोजन व ठहरने के लिये गंधवानी और मनावर में ही सुविधा है।                          

                                                                 

                                                                           ।।  जय श्री राम ।।
           

Muradpura.hanuman.ji.shajapur



मुरादपुरा हनुमान जी,शाजापुर


दिव्य बाल हनुमान जी
मुरादपुरा हनुमान मंदिर, शाजापुर 

मुरादपुरा हनुमान मंदिर में कई बार जाने का अवसर मिला। जब भी दिव्य प्रतिमा के दर्शन करता, अपने में एक सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को महसुस करता। एक बार मन में मंदिर के बारे में जानने कि इच्छा जाग्रत हुई। इसी इच्छा को लेकर मंदिर से जुडे कुछ वृद्ध सज्जनों से मुलाकात की। 

कथा ः-

एक प्रचलित कथानुसार सैकडों वर्षो पुर्व जहां आज मंदिर है।वहां पर खेत हुआ करता था।धने जंगल के मध्य से नदी पार करके खेत में जाने का रास्ता था। इस मार्ग पर एक पुराने वृक्ष को किसान काटना चाहता था। एक दिन जब वह वृक्ष को काट रहा था। उसी समय ऐसा न करने का चेतावनी भरा स्वर गूंजा। किंतु किसी के न दिखाई देने पर वहम समझ ध्यान नहीं दिया और वृक्ष को काट दिया। अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई।
इस धटना से ग्रामीण भयभीत हो वहां जाने से डरने लगे। कुछ समय बाद हनुमान भक्त बेजु बा रजक वहां से गुजरे तो उन्हें दिव्य अनुभूति का अहसास हुआ। वह नित्य वहां जाते और हनुमान जी का स्मरण करते थे।एक दिन उन्हे स्वप्न में हनुमान जी ने दर्शन देकर उस स्थान पर प्रतिमा होना बताया। अगले दिन सभी की सहमति से खुदाई करने पर हनुमान जी की बाल रूप खडी मुर्ति मिली। उन्होने पुरे विधी विधान से मुर्ति स्थापित कर नित्य पुजा अर्चना करने लगा।


मुरादपुरा हनुमान मंदिर
मुरादपुरा बाल हनुमान मंदिर, शाजापुर 

कुंडी  :-

मंदिर के पास ही वह कुंडी भी है। जहां से मुर्ति प्रगट हुई थी।
 
धीरे धीरे ग्रामीण भी मंदिर से जुडने लगे। कई भक्त अपनी मनोकामना लेकर हनुमान जी की शरण में आते है और पुर्ण होने पर अपनी श्रद्धानुसार चोला, प्रसाद अथवा भंडारा करवाते है। 

 प्रभू कृपा :-

एक ऐसे ही भक्त की आप बीती बताते है। बहुत पुरानी बात है। जावरा के प्रतिष्ठित व्यापारी का कारोबार बहुत अच्छा चल रहा था। ना जाने किस की नजर लग गई। उनसे उस समय के ईनामी डकैत ने बहुत बडी रकम की मांग रख दी और न देने पर परिवार सहित खत्म कर देने की धमकी। अब व्यापारी बडी मुसीबत में पड  गये। अचानक बहुत बडी रकम की व्यवस्था कर पाना संभव नहीं था। उस पर जीवन बचाने की चिंता। इस फिक्र में वे परिवार सहित अज्ञात स्थान पर चले गये। एक दिन भयग्रस्त व्यापारी मुरादपुरा हनुमान जी के मंदिर में अपनी याचना लेकर गये और प्रभू चरणों में  व्यथा रखी।

हे प्रभू प्राण संकट में है। रक्षा करो अब तो तुम ही तारणहार हो।  
अपनी विनती लगा इंदौर चले गये। डकैत के डर से बार बार स्थान बदलने की भी मजबुरी थी। एक दिन वे किसी काम से बाहर जाने के लिये इंदौर बस स्टैंड गये थे। तभी उनकी नजर अखबार में प्रकाशित एक खबर पर पड़ी। वे खुशी से झुम उठे और हनुमान चालीसा की पंक्तियां गुनगुनाने लगे। 
तुम रक्षक काहू को डरना। ईनामी डकैत पुलिस मुठभेड में मारा गया था। इसी तरह के अनगिनत किस्से हैं।   

   मंदिर परिसर में नवग्रहों के मंदिर और एक छोटा सा शिवालय भी है।

मंदिर के पिछले भाग में एक छोटा सा बगीचा है। जहां बच्चों के मनोरंजन के लिये झुले लगे हुऐ है।

मुरादपुरा हनुमान मंदिर बगीचा


पास ही धर्मशाला बनी हुई है। कोरोना काल में मंदिर बंद कर दिया है। बाहर से ही दर्शन कर सकते है। सावधानी व सुरक्षा के मध्ये नजर रखते हुऐ विशेष प्रकार की घंटी लगी हुई है।जब आप घंटी के सामने जाते हैं।तो बजती है


मुरादपुरा हनुमान मंदिर बगीचे के झूले



 नेशनल हाईवे आगरा बाम्बे मार्ग पर इंदौर से आगरा जाते समय शाजापुर शहर के पास ही यह मंदिर स्थित है।

               "जय श्री राम"


Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)

                   जय श्री कृष्ण

 

हम
Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)
Salasar bala ji 

 सब को खाटू श्याम जी में दर्शन लाभ न मिलने से बहुत मायूसी हो रही थी। किंतु फिर  तय किया कि समय व्यर्थ न करते हुऐ सालासर बाला जी के ही दर्शन कर लिये जाये। वैसे भी शनिवार का दिन बाला जी के दर्शनों के लिये उत्तम माना जाता है। सालासर बाला जी खाटू श्याम जी से 105 किमी की दूरी पर जयपुर - बीकानेर मार्ग पर स्थित है। 


Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)
लक्ष्मण द्वार, सालासर 

गूगल आंटी से मार्ग निर्देशन लिय कुछ किमी तक तो सिंगल और धुमावदार रोड होने से धीरे चलना पड रहा था।सीकर से हाई-वे मिलने पर गाडी की स्पीड बढ गई। लक्ष्मणगढ के पास ही सालासर धाम विकास समिती द्वारा निर्मित श्री लक्ष्मण द्वार बनाया गया है। यहां से 30 किमी की दूरी पर सालासर धाम में विराजित हैं  दाढी मूंछ धारण किये हुऐ बाला जी का भव्य स्वरूप।

श्री सालासर बाला जी की कथा -- 

श्री सालासर बाला जी की कथा कुछ ऐसी है कि सालासर  के असोटा ग्राम में  एक जाट किसान अपने खेत की  जुताई में तल्लीन था। अचानक हल सें कोई चीज टकराई , वह कुछ देर रुक कर फिर हल चलाने की कोशिश करने लगा किंतु हल तो नहीं चला अपितु वहां से आवाज आई। तब तक किसान कि पत्नि भोजन लेकर आ गई थी। उस स्थान की खुदाई करने पर वहां दो मुर्तियां मिली। पत्नि ने मुर्तियों को साडी के पल्लू से पोंछ कर साफ किया तब पता चला कि ये मुर्तियां तो बाला जी की है। किसान ने पत्नि के साथ पुजन अर्चन कर घर से लाये चूरमें का भोग लगाया। और गांव के ठाकुर साहब को इसकी सूचना दी।

Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)
हनुमान जी, सालासर 

बाला जी का पूजन कर एक मूर्ति को सालासर और दुसरी मूर्ति को यहां से 23 किमी नागौर जिले में स्थापित किया। इधर सालासर में उसी दिन हनुमान जी ने अपने परम भक्त बाल ब्रह्मचारी मोहन दास जी को स्वप्न में दर्शन देकर असोटा में प्रकट होने कि बात बताई और कहा कि मूर्ति को यहां लाकर स्थापित करो। मोहन दास जी ने स्वप्न की बात का जिक्र कर ठाकुर साहब को संदेश भेजा। ठाकुर साहब आश्चर्य चकित हो गये उन्हे भी इसी तरह का स्वप्न आया था। वे विचार करने लगे कि ये कैसे संभव है। तब उन्होने मोहन दास जी को मूर्तियों को ले जाने के लिये कहा। मोहन दास जी दो बैलगाड़ियां लेकर असोटा पहूंचे। वहां मूर्तियों  पाबोलाम‌ (जसवंतगढ़ ) के लिये रवाना किया। सुबह जसवंतगढ़ में और शाम को सालासर में एक ही दिन श्रावण शुक्ल पक्ष नवमी संवत 1811 शनिवार को दोनों स्थानों पर  स्थापित किया गया। जिस बैलगाड़ी से सालासर मूर्ति ला रहे थे। वह एक स्थान पर रुक गई ।वहीं पर आज का मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर के निर्माण में दो मुस्लिम कारीगर फतेहपुर के नूर मोहम्मद और दाऊ का विशेष योगदान रहा है।

सालासर बाला जी मंदिर की व्यवस्था --

 मंदिर कि देखरेख मोहन दास जी ट्रस्ट द्वारा उनके भांजों के वंशज करते आ रहे हैं। 

मंदिर में आज भी दो बैलगाड़ियां खडी रहती है।

    मनोकामना पुर्ती के लिये --यहां कि विशेषता भक्त और भगवान के मध्य कोई नहीं। सीधे बाला जी से निवेदन के लिये एक नारियल लेकर अपनी मनोंकामना मन में दोहराइये और वहीं पर बांध दिजीये। मनोकामना पूर्ण होने पर नारियल अपने आप गिर जाता है। जिसे बाद में मंदिर के सेवादार एक तय जमीन में विसर्जित कर देते है। 


Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)
श्री बालाजी धाम, सालासर 

अखंड धूना --

यहां पर मोहन दास जी द्वारा प्रज्वलित धुना आज भी जाग्रत है। भक्त लोग इसकी राख धारण करते है। पास ही वृक्ष पर सैकडों पक्षियों का डेरा है।, मंदिर में पिछले 8 सालों से निरंतर रामायण पाठ और 20 वर्षो से हरि कीर्तन राम धुन जारी है।

श्री मोहन दास मंदिर -- 

यहां पर संत मोहन दास जी और कनिदादी के पैरों के निशान और समाधि स्थल की। पुजा होती है व  आगंतुक यहां श्रद्धा से नमन करते है                                                     

  सालासर के आस पास अन्य दर्शनिय स्थल                     

1.   अंजनी माता मंदिर

2.    जमवाय माता मंदिर

3.    चांदपोल मंदिर

4.     त्रि पति बालाजी 

5.      हरीराम बाबा मंदिर

6.      शयनन माता मंदिर 

    

 करीब 1100 वर्ष पुराना यह मंदिर सालासर से 15 किमी दूर रेगिस्तान में पहाडीं पर स्थित है। 

पर्यटन स्थल --

सालासर में एक टैंक भी रखा हुआ है। पर्यटक यहां फोटोग्राफी का आनंद लेते है। हमने भी इसका   आनंद लिया और टैंक को करीब से देखा।

    

Salasar bala ji dham ( सालासर बाला जी)
श्री बालाजी धाम, सालासर 


उत्सव व मेले --

हनुमान जयंती , चैत्र शुक्ल व अश्विन शुक्ल पूर्णिमा को भव्य मेले का आयोजन होता है। बहुत दूर दूर से श्रद्धालू दर्शन को आते है।

यहां ठहरने के लिये धर्मशालाऐं व होटलें हैं। तथा खाने के लिये भोजनालय की उत्तम व्यवस्था है। समय समय पर भंडारों का भी आयोजन होता रहता है

कैसे पहूंचे --

जयपुर -बीकानेर राजमार्ग पर स्थित है। 

सीकर -57

सुजानगढ-24

लक्ष्मणगढ-30

पिलानी-140

जयपुर से सालासर बाला जी की दूरी -171 किमी है।

बीकानेर-178 किमी 

निकटतम हवाईअड्डा -

जयपुर और बीकानेर

सालासर के निकटतम रेल्वे स्टेश  सुजानगढ ,जयपुर ,सीकर ,डीडवाना और रतनगढ 

    शाम के पांच बजे हम लोगों ने वापसी का सफर शुरु किया।लग रहा था रास्ते में कहीं रुकना पड़ेगा। 

चलिये फिर मिलते है। एक नये सफर में तब तक के लिये अलविदा और हां आपका कोई सुझाव हो तो अवश्य दें

                                                                जय श्री कृष्ण      




हनुमान मंदिर सारंगपुर


ऊना से सुबह जल्दी निकल पड़े थे। 190 किमी का सफर तय करके हमें हनुमान मंदिर सारंगपुर पहुंचना था। जो कि लगभग चार से पांच धंटे का सफर था।  

एक घंटे की लगातार ड्राईव के बाद सुस्ती सी आने लगी थी। रास्ते में रेस्टोरेंट पर चाय नाश्ते के लिये रूके। यहां पर हमने रास्ते के बारे में भी सुनिश्चित कर लिया।

सारंगपुर मंदिर   

हनुमान मंदिर सारंगपुर के बारे में बहुत सुना था। अतः उत्सुकता तो बढ़नी ही थी। 11 बजे सारंगपुर पहुंचे। मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत बडा व सुंदर था। गाडी पार्किंग की व्यवस्था एक खुले मैदान में थी। 



कष्टभंजन हनुमान मंदिर प्रवेशद्वार
कष्टभंजन हनुमान मंदिर प्रवेशद्वार
    
पार्किंग से लगे सुंदर बगीचे के दोनो और धर्मशाला के कमरे बने हुऐ थे।यहां पर हर श्रेणी की व्यवस्था थी। बगीचे को  पार करने के बाद नीलकंठ महादेव का अत्यंत मनोहारी मंदिर बना हुआ है। थोडा आगे जाने पर  मंदिर परिसर का किलेनुमा प्रवेश द्वार आता है।

हम आगे की चर्चा से पहले यहां की पौराणिक कथा पर गौर कर लेते है। 

पौराणिक कथा   

कष्टभंजन हनुमान मंदिर
कष्टभंजन हनुमान मंदिर

 
 पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शनिदेव अपने बल के अभिमान में सारी सीमाएं लांघकर हर तरफ त्राहि त्राहि मचा दी। तब भक्त हनुमान जी की शरण में गये। यह बात जब शनिदेव को पता चली तो वे घबराये और अपने बचाव का मार्ग तलाशने लगे। शनिदेव जानते थे। कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी है और वे स्त्री पर कभी हाथ नहीं उठायेंगे। तब शनिदेव स्त्री रूप में हनुमान जी की शरण गये और अपनी गलती की क्षमा याचना की इस तरह सभी भक्तों के कष्ट दूर हुऐ। तभी से कष्टभंजन नाम से प्रसिद्ध हुऐ। 


मंदिर बगीचा ,सारंगपुर
मंदिर बगीचा ,सारंगपुर

यदि कोई शनि बाधा से पीड़ित हो तो इनकी शरण में जाने पर निर्भय हो जाता है। इसी तरह भूत प्रेत पीडितों का भी यहां पर उपचार किया जाता है।   


कहते है स्वामीनारायण जी हनुमान जी के बडे भक्त थे। उन्हे हनुमान जी ने साक्षात दर्शन दिये थे। स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने 1905 विक्रम संवत की अश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी को मंदिर नींव रखी थी। मुर्ति की स्थापना के समय जब मुर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तब उन्होने एक राड को स्पर्श करने  पर मुर्ति जाग्रत हो गई थी              
मंदिर में हनुमान जी के चारों ओर वानर सेना तथा चरणों में शनिदेव स्त्री रूप में विराजित है। स्वयंम हनुमान जी महाराजा रूप में 45 किलो सोना 95 किलो चांदी जडित सिंहासन पर विराजित है। हीरे जवाहरात जड़ित मुकुट और सोने की गदा है। 

 शनिवार मंगल वार विशेष पुजा अर्चना होती है। मंदिर की आरती इस प्रकार है।
मंगला आरती   5.15 सुबह
बाल भोग        6.30 -7.30
श्रंगार आरती    7.00    शनिवार ,मंगलवार
राज भोग         10.30-11.30
विश्राम            12- 15.00
शयन              21.00 बजे

वेब साईट : 
www.salangpurhanumanji@yahoo.co.in


मंदिर की अपनी भोजनशाला है । जहां भंडारा चलता है। प्रसादी का काउंटर अलग बना है। प्रसाद रूप में सुखडी मिलती है।

मंदिर की अपनी व्यवस्थित गौ शाला भी है।
                        
                                         

श्री हरि मंदिर 



श्री हरी मंदिर

                                                

 पास में हवेलीनुमा मंदिर है। जहां पर लकड़ियों की आकर्षक शिल्प कला से मंदिर की भव्यता और बढ जाती है। यहां स्वामीनारायण जी का निवास था। जो अब मंदिर रूप में है। स्वामी जी के द्वारा उपयोग में लाई बैलगाड़ी व अन्य सामान संजो के रख रखा है।  यह मंदिर देखने योग्य है।                                                                                                                    .                             

 नारायण कुंड  

श्री स्वामीनारायण मंदिर

ब्रह्मस्वरूप प्रमुख स्वामी स्मृति मंदिर          

नजदीकी रेल्वे स्टेशन बाटोड व सडक मार्ग से 

राजकोट से 150 किमी 

भावनगर से  90 किमी 

अहमदाबाद से 170किमी दूरी पर है।     कल Swaminarayan Mandir  स्वामीनारायण मंदिर वडताल के दर्शन करेगे ।                                         

                                                            "   शुभ रात्री  "


                                          






Popular post