शिमला के पर्यटन स्थल
![]() |
| डॉ. यशवंत सिंह परमार की मूर्ति |
शिमला में मॉल रोड के पास ज़्यादातर होटल रेनोवेट की हुई, सदियों पुरानी इमारतों में हैं। वे अपने ओरिजिनल आर्किटेक्चर कैरेक्टर को बनाए रखते हैं, बस उन्हें नया लुक देने के लिए दोबारा पेंट किया जाता है। हम ऐसे ही एक होटल में रुके थे। पीक सीज़न में रात 8:00 बजे शिमला में होटल ढूंढना काफी मुश्किल था।
होटल ठीक-ठाक मिला , सबसे अच्छी बात यह थी कि यह मेन मार्केट के पास था। पार्किंग की सुविधा भी बहुत अच्छी थी; छोटी सी जगह में आसानी से चार या पांच कारें आ सकती थीं।
होटल में फ्रेश होने के बाद, हम सीधे मार्केट की ओर चल पड़े। सबको भूख लगी थी, इसलिए एक रेस्टोरेंट में डिनर किया। इन सब में देर हो चुकी थी, और मार्केट पहले ही बंद हो गया था। शुरू में, हमने होटल लौटने का सोचा, लेकिन फिर कुछ टूरिस्ट को "रिज मैदान" की ओर जाते देखा। तो विचार बदल गया। वहां पहुंचने के दो रास्ते थे: एक सीढ़ियों से और दूसरा सड़क से, जो एक लंबा रास्ता था। सीढ़ियों वाला रास्ता बेहतर विकल्प के रूप में चुना।
"द रिज"
![]() |
| " रिज मैदान" शिमला |
" रिज मैदान" शिमला में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यहां हर दिन टूरिस्ट की भीड़ लगी रहती है। आस-पास पहाड़ों के सुंदर नज़ारे , ऊंचाई पर खुली जगह में ताज़ी हवा का आनंद इसे और रोचक बना देता है। खाने के लिए फ़ूड ज़ोन जहां स्ट्रीट फूड के बहुत सारे ज़ायके मिल जायेगें। यदि आप शापिंग के शौकीन हैं तो थोड़ी दूरी पर एक और मार्केट है जहां काष्ठ से निर्मित हस्त कलाकृतियां, ऊनी कपड़े और कई सारी दुकानों वाला एक छोटा सा बाज़ार है। घुड़सवारी के शौकीनों का भी ख्याल रखा गया है। बच्चों की मनपसंद जगह है इधर-उधर खुब दौड़ लगाओ कोई चिंता नहीं, क्योंकि यहां सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित है। सेल्फ़ी पॉइंट सबसे आकर्षक जगहों में से एक है। यहां पर ज़्यादा भीड़ होती है। पर्यटक अक्सर मोबाइल फ़ोन पर यादगार पलों को कैद करते हुए मिल जायेंगे। यहां के पलों का आनंद लेने के लिए बेंचें लगी हुई हैं। कहा जाता है कि यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नज़ारा बहुत शानदार लगता है। अन्य आकर्षणों में हिमाचल प्रदेश के फाउंडर डॉ. यशवंत सिंह परमार की मूर्ति, टाउन हॉल, चर्च शामिल हैं, और यहां से थोड़ी दूर चलने पर मॉल रोड है। जहां बड़े और मशहूर ब्रांड के स्टोर हैं। रिज का मुख्य आकर्षण शाम का समय होता है, जब यह चारों ओर जगमगाती रोशनी से जगमगाता है। रात के 11 बज चुके थे। पूरा बाज़ार बंद होने लगा था। ज़्यादातर लोग जा चुके थे। हम भी होटल की ओर चल दिए।
सुबह 5:00 बजे पहाड़ों की प्राकृतिक शांति सुकून दे रही थी। घाटी के मनमोहक नज़ारों का सम्मोहन और ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर बने घर एक-दूसरे के ऊपर बने ऐसे लग रहे हो मानो इन्हें सजा के रखा गया हो। दूर पहाड़ियों के पीछे हल्की लालिमा सूरज के आने का स्वागत कर रही थी। पक्षियों के झुंडों का आसमान में ऊंची उड़ान भरते हुए मधुर संगीत का अविरल प्रवाह मन प्रफुल्लित कर रहा था। इन आनंद के क्षणों से बेख़बर परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद में थे। मैंने सबको जगाया और जल्दी से तैयार होने को कहा और खुद भी तैयार होने चल दिया। शिमला और आस-पास के इलाकों में घूमने के लिए टैक्सी बुक की थी। यहां अपनी गाड़ी से घूमने में सबसे बड़ी दिक्कत पार्किंग की है। कुछ जगहों पर तो पार्किंग बहुत दूर पर होती है उसके लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में टैक्सी आपको आपकी मंज़िल पर छोड़कर चली जाती है। हमारी टैक्सी सुबह ठीक 7:30 बजे होटल आ गई थी। आज हम ब्रिटिश शासनकाल की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला और आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर करने वाले हैं।
चलिए शिमला के बारे में जानते हैं। शिवालिक पर्वतमाला की सात पहाड़ियों पर बसा शिमला समुद्र तल से लगभग 2,200 मीटर ऊपर है। इसे "पहाड़ों की रानी" भी कहा जाता है। पहाड़ों में सुबह के नज़ारे सच में बहुत खूबसूरत होते हैं। ठंडी हवा के बीच, हमारी कार दूसरी कारों और बसों के साथ कुफरी जा रही थी। यह रास्ता बस स्टैंड के पास से गुज़रता है, जिससे ट्रैफिक जाम हो जाता है। हालांकि, थोड़ी देर बाद ट्रैफिक फिर से चलने लगा। जल्दी में, हमने चाय, नाश्ता भी नहीं किया था। इसलिए, ड्राइवर से एक रेस्टोरेंट पर रुकने को कहा। संजौली बाईपास पर कुछ होटल हैं। हम उनमें से एक, होटल सन साइन में रुके। यह होटल पहाड़ों के नज़दीक बना था। यहां से, पहाड़ों और घाटियों के नज़ारे सच में बहुत खूबसूरत लग रहे थे। नाश्ते के बाद, हम अपनी मंज़िल, कुफरी की ओर चल पड़े।
![]() |
| होटल सन साइन |
शिमला से 14 km दूर, कुफरी एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन है।
यहां कई एडवेंचर एक्टिविटीज़ होती हैं।कूफरी में इतनी ज़्यादा भीड़ थी, हमने कल्पना भी नहीं की थी। यहां दो बड़ी पार्किंग हैं मगर दोनों ही भरी हुई थीं। ऐसे में हम एम्यूजमेंट पार्क की तरफ मुड़ गए। एंट्री गेट पर ही टिकट लेना होता है। यहां कई प्रकार के फन गेम संचालित किए जाते हैं। जहां आप बहुत मौज-मस्ती कर सकते हैं। इतने सारे एडवेंचर गेम्स में समय का पता ही नहीं चलता। यहां से हम कूफरी की सबसे ज़्यादा पसंदीदा जगह हिमालयन नेचर पार्क की तरफ चल दिए। इस ज़ू में हिमालयी वन्यजीव, ख़ासकर लेपर्ड,भालू,हिरण व अन्य मिल जाते हैं। यहीं पर एक सेल्फी पॉइंट है जहां आप अपना और परिवार का अविस्मरणीय फोटो शूट कर सकते हैं। हमने लेपर्ड को पास से देखा और भालू की हरकतें तो अचम्भित कर गई , वो दोनों पैरों पर ऐसा खड़ा हुआ था मानो कोई इंसान हो।
![]() |
| हिमालयन नेचर पार्क |
करीब एक घंटे के इस सफर में बहुत से वन्य जीवों को पास से देखा। ये बहुत ही रोमांचक पल थे। कूफरी के टॉप पॉइंट पर जाने के लिए घोड़ों का सहारा लेना पड़ता है। इस स्थान से कूफरी के खूबसूरत दृश्यों का आनंद लेना एक रोचक अनुभव है। दोपहर के 3.00 बजने वाले थे, हम वापस शिमला की तरफ चल दिए। रास्ते में एक दो जगह देखने लायक थी। यहां पर पहाड़ी फलों की छोटी-छोटी दुकानें मिलती हैं। इन दुकानों पर ताज़े फल उपलब्ध रहते हैं, जिनका हमने भरपूर मज़ा लिया।आस पास के नजारे देखने लायक थे। बड़ी संख्या में पर्यटक रुककर इन प्राकृतिक दृश्यों का लुफ्त उठा रहे थे।
![]() |
| हनुमान की 108 फुट ऊंची मूर्ति |
हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही ऊंचाई पर स्थित है शिमला की सबसे पुरानी और मशहूर जगह, जिसे शिमला की शान भी कहा जाता है, जाखू पहाड़ पर भगवान हनुमान की 108 फुट ऊंची मूर्ति है। दूर से दिखने वाली यह बड़ी प्रतिमा आज भी इस जगह पर है, जो "रिज" से तीन किलोमीटर की चढ़ाई पर अल्पाइन पेड़ों से घिरी है। एक पुरानी कहानी के मुताबिक, भगवान हनुमान ऋषि यक्षु से संजीवनी बूटी के बारे में जानकारी लेने के लिए इस पहाड़ पर रुके थे। जानकारी मिलने के बाद, वे चले गए। रास्ते में एक राक्षस से लड़ाई में उन्हें देर हो गई, और वे ऋषि से मिले बिना ही लौट आए। ऋषि हनुमान जी के लिए परेशान हो गए। इस पर, भगवान हनुमान जी उनके सामने प्रकट हुए, और तब से, इस मंदिर को एक जीवंत जगह माना जाता है। यहां से, शिमला शहर के शानदार नज़ारे देखे जा सकते हैं।
![]() |
| हनुमान की 108 फुट ऊंची मूर्ति |
शिमला में हमारा मुख्य आकर्षण मॉल रोड ही रहा, और हर कोई इसके लिए बेताब था। शाम को 5.30 बजे हम मंदिर से सीधे होटल चले गए। कुछ देर आराम करने के बाद हम फिर से मॉल रोड की तरफ चल पड़े। शाम को मॉल रोड पर हर जगह भीड़ थी और मार्केट में लाइटें जगमगा रही थीं। दुकानें सजी हुई थीं और कस्टमर का इंतज़ार कर रही थीं। यहां हर कोई अपनी ही दुनिया में बिज़ी था। कहीं कोई इवेंट चल रहा था, एक तरफ म्यूजिक बैंड अपनी धुन बजा रहे थे। हमारे लिए सबसे अट्रैक्टिव चीज़ ट्रैफिक पॉइंट पर खड़ा पुलिसवाला था जिसके साथ लोग सेल्फी ले रहे थे। हमने भी एक फोटो क्लिक की।
![]() |
| शिमला मॉल रोड |
और इस तरह हमारी शिमला यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी थी। कल सुबह आगे की यात्रा पर चलेंगे । कल की यात्रा और चुनौतीयां के बीच सफर जारी है । राह में पड़ने वाले सभी स्थानों के बारे में आप से अपनी स्मृतियों साझा करेंगे। आशा है आपको ब्लॉग पसंद आयेगा। आप भी अपनी राय हमसे साझा कर सकते हैं।
"जय श्री कृष्णा "






















.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)


.jpg)
